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साइबर सुरक्षित भारत – सुरक्षित भारत, सशक्त भारत: डॉ रक्षित टंडन (साइबर विशेषज्ञ द्वारा साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला सुदिति ग्लोबल अकादमी इटावा 19 फरवरी 2026

 

साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला, इटावा
अभियान: साइबर सुरक्षित भारत – सुरक्षित भारत, सशक्त भारत
दिनांक: गुरुवार, 19 फरवरी 2026
स्थान: सुदिति ग्लोबल अकादमी, इटावा

1. उद्देश्य
कार्यशाला का आयोजन विद्यार्थियों, स्टाफ सदस्यों एवं नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं रिपोर्टिंग तंत्र की जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया।

2. उपस्थित गणमान्य अतिथि
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले अतिथि:
• श्री राजीव कृष्णा, डीजीपी उत्तर प्रदेश (ऑनलाइन माध्यम)
• श्री शुभ्रांत कुमार शुक्ला – जिलाधिकारी, इटावा
• श्री हरीश चंदर – डीआईजी, कानपुर रेंज
• श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव – एसएसपी, इटावा
• प्रशिक्षण सत्र का संचालन प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन द्वारा किया गया।

3. प्रमुख विषय
(क) साइबर अपराधों का अवलोकन
डॉ. टंडन ने विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दी, जैसे:
• ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी
• यूपीआई फ्रॉड
• ओटीपी घोटाले
• फिशिंग लिंक
• फर्जी कस्टमर केयर धोखाधड़ी
• सोशल मीडिया हैकिंग
• पहचान की चोरी (Identity Theft)
• “डिजिटल अरेस्ट” धोखाधड़ी (वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस/अधिकारी बनकर धन उगाही)
प्रतिभागियों को सलाह दी गई कि वे किसी के साथ भी ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग विवरण साझा न करें।

4. 1930 – राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग हेतु राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य बिंदु:
• 1930 एक आपातकालीन हेल्पलाइन है जो बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से जुड़ी है।
• तुरंत रिपोर्ट करने से धन को फ्रीज करने और वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
• धोखाधड़ी का पता चलते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें।
रिपोर्ट करते समय आवश्यक जानकारी:
• बैंक/यूपीआई आईडी
• ट्रांजेक्शन आईडी
• दिनांक एवं समय
• ट्रांसफर की गई राशि
• स्क्रीनशॉट या एसएमएस अलर्ट
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि शिकायत ऑनलाइन पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
“गोल्डन ऑवर्स” के दौरान त्वरित कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।

5. संचार साथी पहल
भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल की कार्यप्रणाली समझाई गई। यह पोर्टल नागरिकों को निम्न सुविधाएं प्रदान करता है:
• अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच
• अनधिकृत सिम कार्ड की रिपोर्ट एवं ब्लॉक
• खोए/चोरी हुए मोबाइल फोन को ट्रेस एवं ब्लॉक
• दूरसंचार पहचान के दुरुपयोग की रोकथाम
यह पहल सिम आधारित धोखाधड़ी और पहचान दुरुपयोग को कम करने में सहायक है।

6. डेटा ब्रीच जागरूकता – Have I Been Pwned
प्रतिभागियों को https://haveibeenpwned.com/ वेबसाइट के बारे में बताया गया, जिससे यह जांचा जा सकता है कि उनका ईमेल या मोबाइल नंबर किसी डेटा ब्रीच में लीक हुआ है या नहीं।
यदि डेटा ब्रीच पाया जाए तो:
• तुरंत पासवर्ड बदलें
• मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सक्षम करें
• संबंधित खातों को सुरक्षित करें

7. असली और फर्जी वेबसाइट की पहचान
दिशानिर्देश:
• https:// और लॉक चिन्ह की जांच करें
• डोमेन नाम की सही वर्तनी देखें
• संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें
• अवास्तविक ऑफर या तात्कालिक चेतावनी पर भरोसा न करें
• आधिकारिक वेबसाइट की पुष्टि विश्वसनीय स्रोत से करें

8. एसएमएस के प्रकार की पहचान
• सरकारी एसएमएस – आधिकारिक सेंडर आईडी (G से समाप्त)
• सेवा एसएमएस – ओटीपी, बैंक अलर्ट (S से समाप्त)
• इम्प्लिसिट प्रमोशनल एसएमएस (I से समाप्त)
• प्रमोशनल एसएमएस – विज्ञापन एवं मार्केटिंग (P से समाप्त)
धन की मांग, केवाईसी अपडेट, ओटीपी मांगने या कानूनी कार्रवाई की धमकी देने वाले संदिग्ध एसएमएस को सावधानीपूर्वक सत्यापित करें।

9. डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी
मुख्य जागरूकता बिंदु:
• कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती।
• दबाव या धमकी में आकर धन हस्तांतरित न करें।
• तुरंत कॉल काटें और 1930 पर रिपोर्ट करें।

10. मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA)
MFA के प्रकार:
• कुछ जो आप जानते हैं (पासवर्ड)
• कुछ जो आपके पास है (ओटीपी/ऐप)
• कुछ जो आप हैं (बायोमेट्रिक)
लाभ:
• अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ता है
• पासवर्ड लीक होने पर भी सुरक्षा प्रदान करता है
• अनधिकृत पहुंच को रोकता है

11. पासकी (Passkeys) का परिचय
डॉ. टंडन ने पासकी को पासवर्ड का सुरक्षित विकल्प बताया।
मुख्य विशेषताएं:
• फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या डिवाइस पिन से लॉगिन
• इंटरनेट पर पासवर्ड का ट्रांसमिशन नहीं
• फिशिंग के प्रति अत्यधिक सुरक्षित
• तेज और अधिक सुरक्षित प्रमाणीकरण
प्रतिभागियों को जहां संभव हो, पासकी सक्षम करने के लिए प्रेरित किया गया।

12. व्हाट्सएप खाते की सुरक्षा
• टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्षम करें और मजबूत पिन सेट करें।
• ओटीपी, पिन या वेरिफिकेशन कोड किसी के साथ साझा न करें।
• धन मांगने वाले संदेश की पुष्टि संबंधित व्यक्ति को सीधे कॉल करके करें।
• संदिग्ध लिंक या अज्ञात अटैचमेंट पर क्लिक न करें।
• गोपनीयता सेटिंग “My Contacts” तक सीमित रखें।
• किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वतः ग्रुप में जोड़ने की अनुमति बंद करें।
• फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन से ऐप लॉक करें।
• ऐप और फोन सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट रखें।
• संवेदनशील कार्यों हेतु सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग न करें।
• संदिग्ध गतिविधि होने पर लिंक्ड डिवाइस से लॉग आउट करें, संपर्क को ब्लॉक करें और 1930 पर रिपोर्ट करें।

13. सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा
• मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें
• MFA और पासकी सक्षम करें
• अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें
• व्यक्तिगत जानकारी सीमित साझा करें
• लॉगिन गतिविधि की नियमित समीक्षा करें
• सार्वजनिक उपकरणों से लॉग आउट करना न भूलें

14. संवाद सत्र
कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और खाता सुरक्षा से संबंधित प्रश्न पूछे। विशेषज्ञ द्वारा सभी शंकाओं का समाधान किया गया और डिजिटल जागरूकता को सुदृढ़ किया गया।

15. निष्कर्ष
यह कार्यशाला अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली रही। इसने साइबर सुरक्षा, रोकथाम उपायों और रिपोर्टिंग तंत्र के प्रति जागरूकता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया। यह पहल एक साइबर जागरूक एवं डिजिटल रूप से सुरक्षित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।